आलू की नयी किस्म झुलसा रोग नजदीक ना आये, Agriculture with Indian Scientists, New Potato Species

आलू की नयी किस्म झुलसा रोग नजदीक ना आये, Agriculture with Indian Scientists, New Potato Species

(Indian scientists) भारतीय वैज्ञानिकों ने एक और आलू की प्रजाति (potato species) ईजाद की है।  इस प्रजाति  का नाम है नीलकंठ रखा है (species is named Neelkanth), इस प्रजाति की आलू (potato species) एंटी आक्सीडेंट तत्वों (anti-oxidant elements) से भरपूर है। आलू की नयी किस्म झुलसा रोग नजदीक ना आये, Agriculture with Indian Scientists, New Potato Species. 


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ऊगाने  का सही क्षेत्र (Right Growing Area)


इस प्रजाति की आलू (potato species) देश के उत्तरी मैदान क्षेत्रों जैसे पंजाब , हरियाणा , उत्तर प्रदेश , बिहार , पश्चिम बंगाल जैसे राज्य इस प्रजाति के आलू (potato species) की खेती (agriculture) करने के लिए बेहद उपयुक्त है।

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 भण्डारण करना आसान (Easy to Store)


इस आलू के प्रजाति को तैयार करने में एक दशक लंबा समय लगा इतना समय वैज्ञानिकों ने मेनहत करके इस प्रजाति को इजात किया है वैज्ञानिकों का मानना है कि इस प्रजाति के आलू का भण्डारण करना बेहद आसान है और यह ख़राब नहीं होता है।

नीलकंठ प्रजाति का आलू स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत अच्छा है और इसका स्वाद भी बहुत लाजवाब है।

आलू की फसल में झुलसा रोग (Scorching Disease in Potato Crop)


जैसा कि आप सभी को मालूम है आलू की खेती का सबसे बड़ा दुश्मन कोई है तो वह झुलसा रोग है।  यह रोग आम तौर पर आलू की खेती में लग ही जाता है और किसानो की आलू की बरबाद कर देता है।

शिमला के आलू अनुसंधान संस्थान ने नीलकण्ड नामक इस आलू की प्रजाति में झुलसा रोग नहीं लगता है।  और किसानों को आलू की खेती में होने वाले नुकशान से बचाता है।  झुलसा रोग आमतौर पर खड़ी फसल में लगता है जब उसमे आलू लग जाते है।  और इस रोग के कारण आलू का पौधा झुलस जाता है।  और जमीन के निचे लगे आलू सड़ जाता है या फिर पैदावॉर अच्छी नहीं होती है।

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डॉक्टर एस के लूथरा जो कि  नीलकंठ आलू की प्रजाति बनाने वाले टीम के मुखिया है। उन्होंने बताया कि बाजार में पीला , सफ़ेद , और लाल रंग के आलू की किस्में उपलब्ध है। लेकिन जब बात करें बैगनी रंग के आलू की तो यह अपनी अलग ही खूबियों वाला है।  जो किसान आलू की पिछैती खेती करते है उनके लिए यह बहुत लाभ प्रद हो सकता है। और तापमान बढ़ने से इस पर बहुत असर नहीं पड़ता है।

इस प्रजाति के आलू जल्दी ख़राब नहीं होते है।  और इसकी सेल्फ लाइफ बहुत बढियाँ है।  जिससे इस प्रजाति के आलू का भण्डारण में कोई परेशानी नहीं आती है।

इसके आकार की बात की जाये तो यह अंडाकार दिखता है और इसके अंदर का भाग पिले रंग का होता है। डॉक्टर लूथरा ने बताया , कि मौसम में आद्रता अधिक हो जाने, बारिश और कुहासा होने पर आलू में झुलसा रोग लगने की संभावना बढ़ जाती है।  आलू की खेती के लिए ऐसा मौसम बहुत खतरनाक होता है।

लेकिन नीलकंठ प्रजाति के आलू में इसका कोई असर नहीं होता है।  केंद्रीय  आलू संस्थान शिमला के अधीन पश्चिम उत्तर प्रदेश के मोदीपुरम केंद्र पर इस प्रजाति को तैयार किया गया है।  यह 75 से 90 दिनों में तैयार हो जाता है। 
आलू की नयी किस्म झुलसा रोग नजदीक ना आये, Agriculture with Indian Scientists, New Potato Species आलू की नयी किस्म झुलसा रोग नजदीक ना आये, Agriculture with Indian Scientists, New Potato Species Reviewed by S D Yadav on 02 October Rating: 5
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