August 02, 2019

देश का वह राज्य, जहां बिना 'वीजा' के नहीं जा सकते भारत के ही लोग || state of the country where people can not go without 'visa'

 The state of the country where people can not go without 'visa'

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Before going to Jammu and Kashmir, Indians had to get a permit. After the protests, this system is over. But there is still a state of the country, where no Indian can enter without an inner visa. Now it is gaining the demand to remove it.

In Jammu and Kashmir, the situation is still fine. Any citizen of the country can be without permission. But in Nagaland, no Indian citizen can enter without an inner line permit. Only local residents are allowed to roam in the uncontrolled state. This inner line permit is a type of document like an internal visa.

Although the Inner Line Permit Rule was first implemented in Jammu and Kashmir, but after the movement of Shyama Prasad Mukherjee, the permit system was over there. But, this rule in Nagaland continues to this day. Now, this matter has started becoming a matter of debate at the national level.

Recently, BJP leader Ashtini Upadhyay reached the Supreme Court with the case, while on July 23, two MPs raised the issue of Inner Line Permit System in the Lok Sabha. On which government has said that Indian citizens need an in-line permit to travel to Nagaland except for Arunachal Pradesh, Mizoram, and Dimapur. The proposal of the state government to implement the inner line permit for Dimapur is going on.

Inner line permit like internal visa

The inner-time permit system is applicable only in the country in Nagaland. Under the Bengal Eastern Frontier Regulations, 1873, this arrangement allows for a limited period to be admitted in a protected, restricted area. Those seeking access to jobs or tourism are required. It is said that during the period of slavery, the British Government introduced the Inner Line Permit System. Then there was a huge reservoir of herbs and natural medicines in the Nagaland region. Which was sent to Britain? For the medicines to not be seen by others, the British Government initiated the inner line permit in Nagaland. So that the area could not be contacted from the outskirts.

Even after independence, the government continued the inner line permit. The reason behind this was that Naga is different from the lives of tribals, art culture, colloquialism and others. In this case, the inner line permit is necessary for their protection. So that outsiders can not stay here and influence their culture.

ILP is against the original right

Ashnini Upadhyay, who filed the petition against the ILP in the Supreme Court, says that the ILP system is like taking a visa in its own country. It is a violation of Article 14 (equality), 15 (prohibition of discrimination), 19 (freedom) and fundamental rights of 21 (life) to the Indian citizens from the Constitution. Upadhyay said that 90 percent of the population in Nagaland has become a Christian. Inner line permits were arranged for the protection of Naga tribals. Now, when 90 percent of the population has been Christian there, the official language of the government has been English. Every village has a church.

Adivasis are married to Christian customs in churches instead of their old customs. In such a situation, there was no justification for the enforcement of the inner line permit for the protection of the Nagas. Ashnini Upadhyay alleges that local leaders of Nagaland want to run a separatist shop that the local people can not contact people outside. An attempt is being made to cut Nagaland from the country and the world through the inner line permit. Now the state government wants to implement the permit system in Dimani too. On July 2, the Supreme Court has dismissed Upadhyay's petition saying he does not want to hear this issue right now.

Special things about Nagaland

Most part of Nagaland is hilly. Only Dimapur is the plains, where railways and airlines are available. Earlier Dimapur was in the part of Assam. But to add Nagaland to the country's transport, it was given to the field of the field Dimapur. Three days a week to connect Dimapur to Kolkata, Indian Airlines is flying. Government website knows has many important information about Nagaland. For example,

On December 1, 1963, Nagaland became the 16th state of the Indian Union.

-Nagaland is surrounded by Myanmar in the east, Arunachal Pradesh in the north, Assam in the west and Manipur in the south.

- Area of ​​Nagaland is 16,579 square kilometers and according to 2001 census, its population is 19,88,636. Apart from the border area of ​​Assam valley, most of the region is mountainous. It has its highest hill station. Which draws a natural borderline between Nagaland and Myanmar.

- The major tribes of Nagaland are- Angami, Ao, Chakheshang, Chang, Khyamniyungan, Kuki, Konyaak, Lotha, Faum, Pochuri, Rangba, Sangamam, Sumi, Yimshchungru and Jeliaan.

On the arrival of the British in the 19th century, this area came under British Shan. After independence, in 1957, this region became a union territory and the governor of Assam started seeing the administration. Previously it was named Naga Hills Tuensang Area.

In 1961, its name was changed to 'Nagaland' and it was given the status of the Union of India.


जम्मू-कश्मीर में जाने के लिए पहले भारतीयों को परमिट लेनी पड़ती थी. विरोध के बाद यह व्यवस्था खत्म हुई. मगर देश का एक राज्य अब भी ऐसा है, जहां बिना आतंरिक वीजा लिए कोई भारतीय घुस नहीं सकता. अब इसे हटाने की मांग जोर पकड़ रही है.

जम्मू-कश्मीर में तो हालात फिर भी ठीक हैं. वहां देश का कोई भी नागरिक बिना अनुमति के जा सकता है. मगर नागालैंड में तो इनर लाइन परमिट लिए बगैर कोई भारतीय नागरिक घुस भी नहीं सकता. केवल स्थानीय निवासियों को ही बेरोकटोक राज्य में घूमने की छूट है. यह इनर लाइन परमिट एक प्रकार से आंतरिक वीजा जैसा दस्तावेज होता है.

यूं तो इनर लाइन परमिट रूल पहले जम्मू-कश्मीर में भी लागू था, मगर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आंदोलन के बाद वहां परमिट सिस्टम खत्म हो गया. लेकिन, नागालैंड में यह नियम आज भी जारी है. अब यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बनने लगा है.

हाल ही में बीजेपी नेता अश्निनी उपाध्याय इस मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर पहुंचे तो वहीं बीते 23 जुलाई को दो सांसदों ने भी लोकसभा में इनर लाइन परमिट सिस्टम के मुद्दे को उठाया. जिस पर सरकार ने कहा है कि भारतीय नागरिकों को  अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और दीमापुर को छोड़कर नगालैंड में यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट की जरूरत होती है. दीमापुर के लिए इनर लाइन परमिट लागू करने के लिए राज्य सरकार के प्रस्ताव पर अभी विचार-विमर्श चल रहा है.

आंतरिक वीजा जैसा होता है इनर लाइन परमिट

देश में इस वक्त सिर्फ नागालैंड में ही इनर लाइन परमिट सिस्टम लागू है. बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेग्यूलेशन्स, 1873 के तहत यह व्यवस्था एक सीमित अवधि के लिए किसी संरक्षित, प्रतिबंधित क्षेत्र में दाखिल होने के लिए अनुमति देता है. नौकरी या फिर पर्यटन के लिए पहुंचने वालों को अनुमति लेनी जरूरी है. बताया जाता है कि गुलामी के दौर में ब्रिटिश सरकार ने इनर लाइन परमिट सिस्टम की शुरुआत की थी. तब नागालैंड क्षेत्र में जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक औषधियों का प्रचुर भंडार था. जिसे ब्रिटेन भेजा जाता था. औषधियों पर दूसरों की नजर न पड़े, इसके लिए ब्रिटिश शासन ने नागालैंड के हिस्से में इनर लाइन परमिट की शुरुआत की थी. ताकि इस इलाके का संपर्क बाहरी क्षेत्रों से न हो सके.

आजादी के बाद भी सरकार ने इनर लाइन परमिट को जारी रखा. इसके पीछे तर्क था कि नागा आदिवासियों का रहन-सहन, कला संस्कृति, बोलचाल औरों से अलग है. ऐसे में इनके संरक्षण के लिए इनर लाइन परमिट जरूरी है. ताकि बाहरी लोग यहां रहकर उनकी संस्कृति प्रभावित न कर सकें.

मूल अधिकार के खिलाफ है ILP

सुप्रीम कोर्ट में आईएलपी के खिलाफ याचिका दायर करने वाले अश्निनी उपाध्याय कहते हैं कि आईएलपी व्यवस्था अपने ही देश में वीजा लेने की तरह है. यह संविधान से भारतीय नागरिकों को मिले अनुच्छेद 14 (समानता), 15 (भेदभाव की मनाही), 19 (स्वतंत्रता) और 21 (जीवन) के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है. उपाध्याय ने कहा कि नागालैंड में 90 प्रतिशत आबादी ईसाई हो चुकी है. नागा आदिवासियों के संरक्षण के लिए इनर लाइन परमिट की व्यवस्था की गई थी. मगर अब जब 90 प्रतिशत आबादी वहां की ईसाई हो चुकी है, सरकार की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी हो चुकी है. हर गांव में चर्च है.

आदिवासी अपने पुराने रीति-रिवाजों की जगह चर्चों में ईसाई रीति-रिवाज से शादियां कर रहे हैं. ऐसे में अब नागाओं के संरक्षण के मकसद से लागू इनर लाइन परमिट का कोई औचित्य ही नहीं रहा. अश्निनी उपाध्याय का आरोप है कि नागालैंड के स्थानीय नेता अलगाववाद की दुकान चलाने के लिए चाहते हैं कि स्थानीय जनता का बाहर के लोगों से संपर्क न हो सके. इनर लाइन परमिट के जरिए देश-दुनिया से नागालैंड को काटने की कोशिश हो रही है. अब मैदानी क्षेत्र दीमापुर में भी राज्य सरकार परमिट सिस्टम लागू करना चाहती है. 2 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट उपाध्याय की याचिका यह कह कर खारिज कर चुका है कि अभी वह इस मसले को सुनना नहीं चाहता.

नागालैंड के बारे में खास बातें

-नागालैंड का ज्यादातर हिस्सा पहाड़ी है. सिर्फ दीमापुर ही मैदानी क्षेत्र हैं, जहां रेलवे और विमान सेवाएं उपलब्ध हैं. पहले दीमापुर असम के हिस्से में आता था. मगर नागालैंड को देश के परिवहन से जोड़ने के लिए उसे मैदानी क्षेत्र दीमापुर दे दिया गया. कोलकाता से दीमापुर को जोड़ने के लिए सप्‍ताह में तीन दिन इंडियन एयरलाइंस की उड़ान है. सरकारी वेबसाइट know पर नागालैंड के बारे में कई अहम जानकारियां हैं. मसलन,

-1 दिसंबर, 1963 को नागालैंड भारतीय संघ का 16वां राज्‍य बना.

-नागालैंड पूर्व में म्‍यांमार, उत्‍तर में अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम में असम और दक्षिण में मणिपुर से घिरा हुआ है.

-नागालैंड राज्‍य का क्षेत्रफल 16,579 वर्ग किलोमीटर तथा 2001 के जनगणना के अनुसार इसकी आबादी 19,88,636 है. -असम घाटी की सीमा से जुडे़ इलाके के अलावा इस राज्‍य का अधिकांश क्षेत्र पहाड़ी है. इसकी सबसे ऊंची पहाड़ी सरमती है. जो, नागालैंड और म्‍यांमार के बीच एक प्राकृतिक सीमा रेखा खींच देती है.

-नागालैंड की प्रमुख जनजातियां हैं- अंगामी, आओ, चाखेसांग, चांग, खिआमनीउंगन, कुकी, कोन्‍याक, लोथा, फौम, पोचुरी, रेंग्‍मा, संगताम, सुमी, यिमसचुंगरू और जेलिआं.

-19 वीं शताब्‍दी में अंग्रेजों के आगमन पर यह क्षेत्र ब्रिटिश शान के अधीन आ गया. आजादी के बाद 1957 में यह क्षेत्र केंद्रशासित प्रदेश बन गया और असम के राज्‍यपाल इसका प्रशासन देखने लगे. पहले इसका नाम नगा हिल्‍स तुएनसांग क्षेत्र था.  

-1961 में इसका नाम बदलकर 'नागालैंड' रखा गया और इसे भारतीय संघ के राज्‍य का दर्जा दिया गया.